प्राइवेट स्कूल कितनी फीस ले सकता है”। इसे समझने के लिए हम भारत के नियम और राज्य शिक्षा बोर्ड के दिशा-निर्देश देखते हैं।
प्राइवेट स्कूल कितनी फीस ले सकता है”। इसे समझने के लिए हम भारत के नियम और राज्य शिक्षा बोर्ड के दिशा-निर्देश देखते हैं।
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1. संविधान और शिक्षा कानून के अनुसार
अनुच्छेद 21A: 6–14 वर्ष तक की उम्र के बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा।
RTE Act, 2009:
प्राइवेट स्कूल में 25% सीटें गरीब बच्चों के लिए मुफ्त/छूट पर आरक्षित होती हैं।
प्राइवेट स्कूल सीधे मुफ्त सीटों पर फीस नहीं ले सकते।
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2. प्राइवेट स्कूल की फीस तय करने का नियम
1. राज्य शुल्क नियामक अथॉरिटी (Fee Regulatory Authority)
हर राज्य ने प्राइवेट स्कूलों की फीस को नियंत्रित करने के लिए प्राधिकरण बनाया है।
प्राइवेट स्कूल अपनी फीस राज्य सरकार की मंजूरी के बिना तय नहीं कर सकते।
2. फीस निर्धारण के घटक
अध्यापक वेतन
भवन और रख-रखाव
लाइब्रेरी, कंप्यूटर, लैब सुविधाएँ
खेल-कूद और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियाँ
3. मासिक / वार्षिक सीमा
हर राज्य अलग-अलग सीमा तय करता है।
उदाहरण:
दिल्ली: Nursery–Class 12 में फीस अधिकतम ₹15,000–₹50,000/साल (सुविधाओं के अनुसार)
महाराष्ट्र: Nursery–Class 12 में फीस ₹10,000–₹35,000/साल
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3. RTE एक्ट के तहत शुल्क
25% आरक्षित सीटों वाले बच्चे कोई फीस नहीं देंगे।
यदि प्राइवेट स्कूल ने RTE स्लॉट के लिए फीस मांगी, तो यह कानून के खिलाफ है।
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4. अतिरिक्त जानकारी
छात्र की उम्र और कक्षा के हिसाब से फीस अलग हो सकती है।
सुविधाएँ (AC क्लास, कंप्यूटर लैब, खेल परिसर) फीस बढ़ा सकती हैं।
अतिरिक्त शुल्क जैसे किताब, यूनिफॉर्म, ट्रांसपोर्ट अलग से लिया जा सकता है।
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📌 निष्कर्ष
प्राइवेट स्कूल फीस तय कर सकता है, लेकिन यह राज्य शुल्क नियामक प्राधिकरण और RTE नियम के अंतर्गत होना चाहिए।
गरीब/आरक्षित बच्चों पर फीस नहीं लगाई जा सकती।
फीस में वृद्धि सुविधाओं और राज्य नियमों के अनुसार सीमित होती है।
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