1) नामांकित रेखाचित्र (Labelled Diagram)
चित्र – दिष्ट धारा डायनेमो
↑ ब्रश (B1)
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┌────────┐
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(N)──┘ └──(S)
ध्रुव ध्रुव
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│ │
│ ↻ │ ← घूमने वाला कुण्डल (Armature)
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└────────┘
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↓ ब्रश (B2)
लेबलिंग (नामांकन):
N, S → स्थायी चुंबक (Magnetic poles)
AB, CD → कुण्डली की भुजाएँ (Armature coil)
R1, R2 → ब्रश (Brushes)
C → विभाजक (Commutator)
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(2) संरचना (Construction):
1. चुंबक (Magnet):
यह स्थायी (permanent) या वैद्युत चुंबक (electromagnet) हो सकता है, जो N और S ध्रुव बनाता है।
2. कुण्डली या आर्मेचर (Armature Coil):
ताँबे के तार की आयताकार कुण्डली AB और CD एक लोहे के कोर पर लिपटी होती है, जो धुरी (axis) पर घूम सकती है।
3. संग्राहक (Commutator):
यह दो अर्द्ध-वृत्ताकार ताँबे की प्लेटों से बना होता है, जो कुण्डली के सिरों से जुड़ी होती हैं। यह धारा को एक दिशा में प्रवाहित रखने का कार्य करता है।
4. ब्रश (Brushes):
कार्बन या ताँबे की बनी दो पतली पट्टियाँ जो कम्यूटेटर से स्पर्श में रहती हैं और बाह्य परिपथ में धारा भेजती हैं।
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(3) सिद्धांत (Principle):
> "जब किसी चालक को चुंबकीय क्षेत्र में घुमाया जाता है, तो उसमें विद्युत वाहक बल (EMF) उत्पन्न होती है।"
यह फैराडे का विद्युत चुम्बकीय प्रेरण का नियम (Faraday’s Law of Electromagnetic Induction) पर आधारित है।
e = -\frac{d\Phi}{dt}
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(4) कार्यविधि या प्रक्रिया (Working or Operation):
1. कुण्डली को चुंबकीय क्षेत्र में घुमाया जाता है।
2. जैसे-जैसे कुण्डली घूमती है, दोनों भुजाओं (AB और CD) में चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है।
3. इससे दोनों भुजाओं में विपरीत दिशा में प्रेरित धारा उत्पन्न होती है।
4. कम्यूटेटर इन धाराओं को इस प्रकार जोड़ता है कि बाहरी परिपथ में धारा हमेशा एक ही दिशा में प्रवाहित होती है।
5. इस प्रकार बाह्य परिपथ में दिष्ट धारा (D.C.) प्राप्त होती है।
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निष्कर्ष (Conclusion):
👉 दिष्ट धारा डायनेमो ऐसा यंत्र है जो यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता है, और उत्पन्न धारा एक दिशा में प्रवाहित (DC) होती है।
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संक्षिप्त उत्तर रूप में:
बिंदु विवरण
संरचना चुंबक, कुण्डली, कम्यूटेटर, ब्रश
सिद्धांत फैराडे का विद्युत चुम्बकीय प्रेरण सिद्धांत
प्रक्रिया घूमती कुण्डली में प्रेरित धारा उत्पन्न होती है, कम्यूटेटर से DC धारा मिलती है
ऊर्जा रूपांतरण यांत्रिक ऊर्जा → विद्युत ऊर्जा (DC)
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