प्रश्न 3. सौर जल ऊष्मक का वर्णन चित्र सहित करें।
अथवा
(म. प्र. 2009)
सौर जल ऊष्मक का चित्र बनाकर कार्यविधि समझाइए।
उत्तर - सौर जल ऊष्मक की कार्यविधि - इसे बनाने में ताँबे के पाइप (नलिका)
का उपयोग किया जाता है, जिन्हें बाहर की ओर से काला रंग दिया जाता है। इस नलिका का एक सिरा ठण्डे जल स्त्रोत से जुड़ा होता है, जबकि दूसरे सिरे से गर्म जल प्राप्त किया जाता है। इस उपकरण को मकान या बिल्डिंग की छत पर या उस स्थान पर लगाया जाता है, जहां सूर्य की किरणें अधिक आती हों। ठण्डा जल जब नली में से होकर प्रवाहित होता है तो ऊष्मा अवशोषित कर गर्म होने लगता है। गर्म जल का घनत्व ठण्डे पानी की तुलना में कम होता है, जिससे यह ऊपर ही रहता है तथा उपयोग के लिए पाइप से बाहर निकाला जा सकता है। चित्र के अनुसार एक संग्रहण टंकी का उपयोग किया जाता है। यह पानी गर्म करने के लिए एक आदर्श संयंत्र है। इससे लगभग 80°C तक पानी को गर्म किया जा सकता है। इस संयंत्र के उपयोग से विद्युत खर्च में कमी की जा सकती है। इस प्रकार का संयंत्र वहाँ ज्यादा उपयोगी है, जहाँ गर्म पानी की आवश्यकता निरन्तर पड़ती है, जैसे- घर, होटल, अस्पताल आदि।
कार्यविधि - सौर जल ऊष्मक में लगे ताँबे के पाइप सौर ऊर्जा को अवशोषित कर गर्म हो जाते हैं जो अपने में प्रवाहित ठण्डे जल को गर्म करते हैं। यह गर्म जल एक संग्रहण टैंक में एकत्रित होता रहता है जिसका आवश्यकतानुसार उपयोग कर लिया जाता है।
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